चिंतित हम सब होते हैं, कभी अपने भविष्य कोे ले कर, कभी अपने बच्चों के भविष्य को ले कर, कभी आपसी विवाद को ले कर। कभी कभी तो लोगों की चिन्तायें इतनी बढ़ जाती हैं कि नर्वस ब्रेकडाउन तक हो जाता है। परन्तु यदि हम गहरे मे सोचें तो हमारी अधिकतर चिन्तायें सिर्फ इस लिये होती हैं कि समाज क्या कहेगा ? पर जो समाज की चिन्ता किये बगैर काम करता है, जिसे अपने पर भरोसा होता है, उन्मुक्त भाव से काम करता है वही समाज को कुछ दे भी पाता है, वही एक मिसाल कायम कर पाता है, वही चिन्ता मुक्त और स्वस्थ भी रह पाता है। समाज का क्या है उसे तो कुछ न कुछ कहना ही है।
मैने सुना है कि एक पिता अपने बेटे और गघे को ले कर कहीं जा रहा था। उसने सोचा कि यदि हम दोनो गघे पर चढ़ जाते हैं तो लोग यही कहेंगे कि कि दोनो गधे पर चढ़ कर बेचारे गधे को मारे डाल रहे हैं इस लिये वह गधे और बेटे के साथ पैदल ही चल पड़ा। अभी वह थोड़ी ही दूर गया था कि रास्ते मे कुछ लोग मिले और कहने लगे “देखो ये कितने मूर्ख हैं गधा साथ है फिर भी पैदल चल रहे हैं।“ पिता ने सोचा कि अब क्या करूॅ, ऐसा करता हॅू कि बेटे को गधे पर बैठा देता हॅू नही तो लोग कहेंगे कि खुद गधे पर बैठा है और बेटा पैदल चल रहा है। अभी वह थोड़ी ही दूर जा पाया था कि रास्ते मे कुछ लोग और मिले और कहने लगे “देखो क्या जमाना आ गया है ? बच्चों ने तो माॅ बाप की कद्र करना ही छोड़ दिया है बेटा खुद गधे पर चढ़ा है और बाप पैदल चल रहा है।” पिता ने सोचा कि अब क्या करूॅ, ऐसा करता हॅू कि बेटे को गधे से उतार देता हॅू और खुद बैठ जाता हॅू। अभी वह थोड़ी ही दूर और जा पाया था कि रास्ते मे कुछ लोग फिर मिल गये और कहने लगे “देखो क्या जमाना आ गया है बाप को तो सिर्फ अपनी फिकर है, खुद गधे पर बैठा है, मासूम बेटा पैदल चल रहा है ? अब वह गुस्से के मारे खुद भी बैठ गया और बेटे को भी बैठा रहने दिया। पर लोग कहाॅ मानने वाले, बेचारा जैसे ही थोड़ा आगे गया पीछे से चिल्लाने लगे ” तुम सब कितने मूर्ख हो निर्दयी हो बेचारे गधे की जान ले लोगे क्या ?“
उसने गुस्से और अवसाद मे गधे को पुल से नीचे धक्का दे दिया और घर वापस आ गया। लोग तब भी कहाॅ पीछा छोड़ने वाले, पूरा गाॅव इकट्ठा हो गया और सब उसे बुद्धू कहने लगे। पीछे से कोई चिल्लाया “लौट के बुद्धू घर को आये।”
तो जो समाज की ज्यादा चिन्ता करता ह्रै लोग उसे बुद्धू ही करार देते हैं, इस लिये यदि आप को लगता है कि आप सही कर रहे हैं, कोई अनैतिक काम नही कर रहे हैं तो समाज की चिन्ता किये बगैर अपने मिशन पर कायम रहें। चिन्ता मुक्त रह कर स्वस्थ जीवन जीयें।
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