
प्यार , प्रेम एक ऐसी चीज , जिसे पाने के लिये , महसूस करने के लिये मानव तो क्या , देवी देवता , पशु पक्षी तक बेचैन रहते हैं। प्यार की माॅग कभी कम नही होती, पर इसको बाॅटने वाला कभी घाटे मे नही रहता, जितना ही बाॅटता है, उसका कई गुना उसे वापस मिलने लगता है। प्यार देने और लेने की कोई शर्त नही होती, जिसके अन्दर प्यार उपजने लगता है , वह देते समय कुछ भी नही देखता कि, किसे प्यार बाॅट रहा हॅू , क्यों बाॅट रहा हॅू ? उस के पास इतना ज्यादा होता है कि, वह बिना बाॅटे रह ही नही सकता, उसके लिये हर कोई सुन्दर है, पूरी प्रकृति सुन्दर है।
प्यार पाने का सबसे आसान तरीका है, सहज हो जाना, बनावटी पन से दूर हो जाना, अपने मूल स्वरूप मे रहना, यानि एक दम मौलिक स्वरूप मे आ जाना। जब आप अपने को दिखाने की कोशिश छोड़ देते हैं तो, आप एक दम प्रकृति के करीब हो जाते हैं , तब जो आप का स्वाभाविक स्वभाव होता है, वह सभी के दिल को स्वाभाविक रूप से छू जाता है। जब आप जो नही हैं, वह दिखने की कोशिश करते हैं, तो आप के व्यवहार का परिवर्तन स्पष्ट नजर आने लगता है। छोटे बच्चे भी जब आपस मे झगड़ा करते हैं तो कहते हैं ”ज्यादा बनो मत।”
बच्चे जब तक अपने सहज स्वभाव मे होते हैं, वो सबको निश्छल भाव से प्रेम देते हैं और सब को प्यारे होते हैं, वो गलती भी करते हैं तो भी उन्हे प्यार मिलता है, वे आपका दाढ़ी मूॅछ नोच लेते हैं, पर तब भी आप उन्हे और कस के चूम लेते हैं। वही बच्चे जैसे जैसे , धीरे धीरे बढ़ते हैं थोड़ी दुनियादारी और चालबाजी सीखते हैं, आप का व्यवहार उनके प्रति बदलता जाता है।
मेरे मुहल्ले मे जूली आयी, कब वह पूरे मुहल्ले के दिल मे समा गयी, हम जान ही नही पाये। वह बस इतना करती है कि मुहल्ले का कोई भी, कहीं भी मिल जाये, वह बेलाग उसके पीछे पीछे दूर तक जायेगी, मौका मिले तो हाथ पैर चूमने के साथ, ऊपर तक चढ़ने की कोशिश करेगी। उसको आप कुछ भी न दो तो भी उसका व्यवहार वही रहता है। उसका यह निश्छल प्रेम लोगों को अनचाहे ही उसका दीवाना बना देता है। उसका बिस्कुट खाने का मन होता है तो वह शापिंग सेन्टर चली जायेगी, वहाॅ उसे कोई न कोई बिस्कुट का पूरा पूरा पैकेट खिलाता ही खिलाता है। अब तो आप समझ ही गये होंगे, जूली कौन है ? जी हाॅ जूली एक प्यारी सी देशी कुतिया है जो मेरे मुहल्ले की रानी है। उसके प्यार के कारण, पूरा मुहल्ला उसका रक्षक है। प्यार बाॅटना हम रोज उससे सीखते हैं।

काश हमारी जरूरतें ज्यादा न होतीं तो हम भी इतने चाल बाज नही होते, हमारा समाज हमे होशियारी नही सिखाता और हम असली जन्नत मे होते।
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