Saturday, 24 October 2015

Bad Rules


लोग क्या कहेंगे ? इस बात का डर, स्ंकोच आदि वह चीज होते हैं जो बच्चों कुंठित ही नही करते बल्कि उन का सब कुछ छीन सकते हैं
मैने देखा है लोग अपने बच्चों को ज्यादा सौम्य और सुशील बनाने के चक्कर मे संकोची बना देते है, उन्हे डरा कर उनकी लीडरशिप छीन लेते हैं जो कि उन्हे हर क्षण उनके विकास मे सहायता के साथ उनकी रक्षा करता।
राहुल एक बहुत ही प्यारा और बुद्धिमान बच्चा था। उसकी राइटिंग की सभी तारीफ करते थे, उसके मार्क सदैव 80 प्रतिशत से ऊपर होते थे, समय से स्कूल आना, समय से स्कूल जाना, सब को उचित सम्मान देना, उस बच्चे की जितनी तारीफ की जाये, कम थी। उसके गाल इतने चिकने और गोल मोल थे कि कोई भी उसे छू देता था। वह अपने परिवार और रिश्तेदारों मे सब को प्यारा था।
राहुल के अब हाई स्कूल के एक्जाम नजदीक आ गये थे, उसके पापा जो कि एक परचून की दुकान चलाते थे, थोड़े थोड़े चिन्तित हो रहे थे, क्यों कि उन्हे तो टाइम मिल नही पाता था, पत्नी उतनी पढ़ी नही थी कि राहुल को मैथ और्र इंिग्लश पढ़ा सके, और उनके पास ट्यूशन कराने का बजट नही था। राहुल भी कभी कभी तनाव मे हो जाता , क्यों कि कुछ प्रश्नो को हल करने के लिये कुछ न कुछ मदद की दरकार हो जाती और तब, जब उसे मदद नही मिल पाती तो वह चिंतित हो जाता। बेटी रिया राहुल से छोटी थी और सातवें मे पढ़ रही थी।
राहुल की पढ़ाई के लिये ऊपर का एक मात्र कमरा खाली कर दिया गया था, जहाॅ कभी कभी रिया भी पढ़ने आ जाया करती थी। मार्च मे एक्जाम थे और अभी फरवरी की शुरूआत थी, जाड़ा अभी चल ही रहा था इस लिये रजाई ओढ़ कर पढ़ने मे राहुल को बहुत मजा आ रहा था। कभी कभी पढ़ते पढ़ते नीद भी आ जाती, पर खुद से आॅख भी खुल जाती और वह फिर पढ़ाई शुरू कर देता।
उस दिन शनिवार था। पापा जल्दी दुकान बन्द कर के आ गये, और आज उनके चेहरे पर विजयी मुस्कान थी, क्यों कि उनके साथ राहुल के मैथ के टीचर विजय सर थे। आते ही उन्होने आवाज लगायी ”बेटा राहुल देखो मेरे साथ कौन आया है ?” पापा ने राहुल को बताया कि विजय सर आज यहीं रूक कर तुम्हे मैथ पढ़ायेंगे। पर जहाॅ राहुल को प्रसन्न होना चाहिये था वह अन्दर ही अन्दर घबरा गया क्यों कि ये वही राहुल सर है जिनको उसने क्लास मे ही लड़कियों के पीठ पर चिकोटी काटते कई बार देखा था, वे उसका भी गाल अक्सर चूम लिया करते, पर उनका चूमना उसे अच्छा नही लगता था।
आज राहुल अकेले, विजय सर के साथ ऊपर के कमरे मे नही जाना चाहता था, पर वह किससे कहे और क्या कहे ? उसे कुछ समझ नही आया तो वह रिया को भी अपने साथ ले गया। रिया खाना खाने के बाद ज्यादा देर तक नही पढ़ पाती थी , वह दस बजे ही सो गयी। रात मे करीब 4 बजे रिया को बिस्तर मे कुछ हलचल महसूस हुई, पर वह नीद मे पलट कर फिर सो गयी। लेकिन थोड़ी ही देर मे उसे फिर एहसास हुआ कि विजय सर राहुल के पीठ पर चढ़े हैं और उसका मॅुह दबा के रखे हैं। उसे जैसे ही राहुल की कराहट का आभास हुआ उसने रजाई हटा दी। उसके रजाई हटाते ही विजय सर अपने कपड़े समेटते हुये छत से खिड़की पर लटकते हुये भाग गये। राहुल अपना दर्द भूल कर रिया को समझाने मे लग गया कि वह किसी को कुछ न बताये। रिया फिर से सो गयी।
सुबह जब तीनो नीचे नही आये तो राहुल की माॅ ऊपर आयी, रिया को जगाया और उन दोनों के बारे मे पूछने लगी। पहले तो रिया को कुछ नही समझ आया कि क्या करे ? पर उसने इशारों मे जहाॅ तक हो सकता था माॅ को समझा दिया। माॅ तो बिल्कुल सन्न रह गयी और बदहवाशों की तरह राहुल को ढूॅढना शुरू कर दी, राहुल कमरे के कोने मे डरा हुआ चादर लपेटे छिपा हुआ था।
राहुल संकोच न किया होता, उसका लीडर अगर दबाया न गया होता तो शायद यह न होता।

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