Monday, 21 September 2015

I am not owner

पैदा होना,  बड़ा होना,  जीवन  भर पैसे के लिए संघर्ष करना, बाहरी दुनिया में ऐशो आराम के संसाधन जुटाना,  बच्चों को बड़ा करना, पढ़ाना लिखाना , बूढ़ा हो जाना फिर घिसट घिसट कर मर जाना।  क्या यही है जीवन ? क्या यही लक्ष्य है जीवन का ? क्या यही चरम उद्देश्य है जीवन का ? यह सवाल हम सब के जेहन में कभी न कभी जरूर आता है।  किसी को पहले आ  जाता है , किसी को बाद में आता  है , किसी को कभी नहीं आता  है , आता  भी है तो वह उसे व्यर्थ का सवाल मान कर जीवन भर झुठलाते रह जाता है, और अपने काम में लगा रह जाता है , या फिर मंदिर मस्जिद गिरिजा जा कर अपनी धार्मिकता दिखा आता है। 
एक बार भगवान बुद्ध के पास एक अमीर आदमी आया उसने कहा मेरे पास अथाह सम्पत्ति है , मुझे लोगो पर बड़ी दया आती है , मै लोगो की सेवा करना चाहता हूँ , उन्हें कुछ देना चाहता हूँ। कहते है  भगवान बुद्ध काफी देर तक उसको दया भाव से देखते रहे और फिर उनकी आँखों में आँसू  आ  गए।  वह आदमी घबरा गया उसने कहा क्या बात है महाराज ? ऐसा क्या अपने मुझ में देखा कि आपकी आँखों में आँसू आ गए ?  भगवान बुद्ध ने कहा तुम दुसरो पर दया करने चले हो मुझे तुम पर दया आ  रही है ? जब अभी तक तुम्हे अपने पर दया नहीं आई है तो तुम दूसरे पर कैसे दया करोगे ? तुम पहले अपने पर तो दया कर लो। तुम जिस संपत्ति को अपना बता रहे हो , जिस पर तुम्हे अहंकार है वह संपत्ति तो तो असल में तुम्हारी है ही नहीं , क्या तुम उस संपत्ति को अपने साथ ले जा पाओगे ? जो संपत्ति तुम ले जा सकते हो वह तो तुम्हारे पास जरा भी नहीं है तुम तो निरे कंगाल हो इस लिए तुम्हे देख कर मेरे आँखों में आँसू  आ गए। असल में तुम्हारे पास संपत्ति तो है पर तुम्हे उसका पता नहीं है और तुम उस पर अपने अहंकार , स्वार्थ और चालबाजियों से इतनी मिटटी डाल  चुके हो की वह तुम्हे नजर ही नहीं आ  आ सकता। वह अथाह संपत्ति तुम्हारे पास थी और तुम जीवन भर छुद्र के पीछे भागते रहे।  चेतना को जगाओ और जो तुम जो  साम्राज्य ले कर पैदा हुए थे उसके मालिक बन जाओ। 
असल में हम सब इसी तरह हैं , हम पूरी दुनिया पा लेना चाहते हैं और इस चक्कर अपने को भूलते जाते हैं , कभी अपनी तरफ आना ही नहीं चाहते , अपने को जानना ही नहीं चाहते , अपने लिए समय ही नहीं है।  पूरा जीवन लगा देते है अपने बाद संपत्ति छोड़ जाने के लिए। जो अपनी आतंरिक संपत्ति पा लेता है उसी का जीवन सफल हो पता है।  

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