हम सब चिन्तित होते हैं। चिन्तायें स्वाभाविक भी हैं, लकिन यदि आप चाहते हैं कि आप का आने वाला कल एक दम बेहतरीन हो तो इसके लिये जो सबसे बढि़या तरीका है वह ये है कि आप अपनी सारी युक्ति आज के काम को बेहतरीन बनाने मे लगा दें, आज खुश रहने मे लगा दें। कल छुपा है आज के पेट मे। आज ठीक है तो कल भी ठीक रहेगा, लेकिन आज आप, कल के लिये चिन्तित हो कर, कल को ठीक करना चाहते हैं, सुधारना चाहते हैं तो कल कभी नही सुधार पायेंगे क्यों कि हर दिन आप यही सोचते हैं कि कल खुश हो लूॅगा, और वो कल कभी नही आता है। आप के चिन्ता करने से कोई चीज समय से पहले आप को मिल गयी है या आप के चिन्ता करने से कोई दुर्घटना टल गयी ? नही न, फिर इसी लिये मै एक बार और कहता हॅू, आप का चिन्ता करना बेकार है, आप के सेहत के साथ खिलवाड, है। उन चीजों का आनन्द लीजिये जो अभी आप के पास है, तभी हमारा दाता ये समझ पाता है कि यह बन्दा खुश रहता है इसके जीवन मे ऐसी परिस्थितियाॅ पैदा करो कि ये खुश ही रहे, इसकी यही चाहत है। जब कोई बर्तमान मे रोता ही रहता है, तब हमारा दाता ये समझता है कि इसकी यही चाहत है, इसके जीवन मे ऐसी ही परिस्थितियाॅ रहने दो। जो आप सोचते हैं जो आप करते हैं, उसी के अनुरूप आप के जीवन का निर्माण होता रहता है।
जब ला आफ अट्रैक्शन कहता है कि इस दुनिया मे हर चीज प्रचुर मात्रा मे है तो हम मानते ही नही और अपनी गणित लगा लगा कर सदैव बेचैन और चिन्तित होते रहते है। प्रकृति ने आप के चिन्तित होने के लिये कोई वजह नही छोड़ा है, लेकिन आपको दुखी होने का, गुस्सा करने का, चिन्तित होने का, कोई न कोई बहाना मिल ही जाता है। आप दुख दर्शी हैं, इस लिये आप को गुलाब की खुबसूरती, बच्चों की मधुर मुस्कान, प्रकृति की सुन्दर मनमोहक शाम, लहलहाते खेत इन सब मे भी आप को सुख नही नजर आता है। जवान जवान बच्चों के चेहरों की मुर्दानगी और झुर्रियाॅ उनके जीवन के सघंर्ष को बयान कर देती है। कहाॅ है उनके जीवन मे आनन्द, और मस्ती ? पर मै अब भी कहता हॅू आप कल की चिन्ता छोड़ दीजिये, सुकरात कहता है ”कल का कोई विचार मत करो क्यों कि कल अपना विचार खुद कर लेगा।“
अब सूरज की किरणों से तरल ईंधन बनाया जा सकेगा, ऐसा सफल प्रयास हावर्ड मेडिकल स्कूल की पामेला रजत नामक रसायनशास्त्री ने किया है। हाॅलाकि अभी इसकी दक्षता 1 प्रतिशत है पर भविष्य मे 5 प्रतिशत तक ले जाने की सम्भावना है। अगर ऐसा हो पाया तो तो हम मुफ्त मिलने वाले अथाह सूरज की किरणों को उसके दूसरे फार्म मे, एक तरह से स्टोर कर सकेंगे। आने वाले ऊर्जा संकट का बहुत सा भाग हल हो सकेगा। इसी लिये मै कहता हॅू कि चिन्ता करने का काम प्रकृति पर छोड़ दीजिये, आप की जरूरत पर प्रकृति आप को वह रास्ता दिखा देगी, कि आप अपनी जरूरत की चीज ढूॅढ लेंगे। आप देखो न, प्रकृति मे मौजूद तो हर चीज थी लेकिन वह तब आप को मिली, जब आप उस के लायक बन सके, हर आपकी जरूरत की चीज क्रमशः आप को मिलती जा रही है। सारे आविष्कार क्रमशः हो रहे हैं। जो पूरी सृष्टि की चिन्ता कर रहा है उसे आप की भी चिन्ता है और ये काम वह हमसे आपसे बेहतर कर सकता है, तो अच्छा हो हम ये काम उसे ही करने दें।
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