Thursday, 12 November 2015

परमात्मा को नाराज न करें God will be Angry

हम अपने जीवन का ज्यादातर हिस्सा इसी उम्मीद में, इसी प्रयास में गुजार  देते हैँ  कि , लोग हमें जानें , लोगों का ध्यान हमारी तरफ आकर्षित हो। दुनिया भर में जितनी भी लड़ाइयाँ हुई है , वे सर्वाइवल के लिए कम और नाम कमाने के लिए ज्यादा हुई हैं।  अगर हमारी निजी जरूरत न हो तो , हम एक सुई भी, तब ही हिलायेंगे जब , उसका हमें कोई सामाजिक लाभ हो रहा हो। बड़ा घर, बड़ी गाड़ी, सब इसी का बदला हुआ रूप है कि  लोग हमें पहचाने, हमारा सामाजिक रुतबा हो,  लोगों का ध्यान हमारी तरफ आकर्षित हो।
 मै एक छोटा सा लेख अगर पोस्ट करता हूँ तो. मेरी तो यही इच्छा होती है कि दुनिया के सारे लोग उसे पढ़ें, वो अलग बात है कि  ऐसा संभव नहीं है। ऐसा इस लिए है , क्यों कि  यह मेरी कृति है।  आप का छोटा बच्चा है, वह एक कागज का जहाज भी बनाता है तो,  दस बार आप को दिखाने आएगा , उसका भी लक्ष्य यही होता है कि  आप उसकी तरफ ध्यान दें , उसकी कृति को तवज्जो दें। यदि आपने  या किसी  ने भी , उसके जहाज यानि उसकी कृति को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की तो वह उससे नाराज हो जाता है। 
जब आप , हम या एक बच्चा अपनी कृति की क्षति को बर्दास्त नहीं कर सकते तो हमारा परमात्मा अपनी कृति को  क्षति ग्रस्त होते हुए कैसे बर्दास्त कर सकता है ? जब हम धार्मिक लड़ाइयों की खातिर लोगों की जानें  लेते हैं , तो हम  परमात्मा की कृति को क्षति ग्रस्त करते हैं जो परमात्मा को नाराज करता है। 
अब आप  कह सकते हैं कि पशु पक्षी तो रोज ही अपने भोजन की खातिर परमात्मा की  कृति को क्षति ग्रस्त करते हैं , आप बिल्कुल सही कह रहे हैं , पर वे  परमात्मा की  कृति को क्षति ग्रस्त करने के बजाय एक प्राकृतिक संतुलन पैदा कर रहे हैं।  अगर ऐसा न हो पूरा समुद्र मछलियों से भर जाय , पूरी धरती मनुष्यों के बजाय कीड़ों मकोडों और पशु पक्षियों से भर जाय। 
धर्म के नाम पर हत्याएँ बंद करिये , धर्म के ठेकेदारों का पीछा छोड़ कर खुद से ज्ञान प्राप्त करिये और आनंद की प्राप्ति करिये। वरना  परमात्मा की  कृति को क्षति ग्रस्त  करना हम सब पर भारी पड़ सकता है , वह कभी भी नाराज हो सकता है , और नाराज होता ही है , हमारे पास ऑंखें होनी चाहिए उसका कोप देखने के लिए। 
  

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