बात चीत का सही तरीका
आप किसी के बारे में अगर सबसे ज्यादा जानना चाहें तो सिर्फ दो मिनट उससे बात करिये और उसका जीवन कैसा है , वह सुखी है , अमीर है या सफल है , आप सब कुछ जान सकते हैं। बात चीत का सही तरीका न केवल आपको सम्मान दिला सकता है बल्कि आप को कुछ भी बना सकता है।जब आप दो लोग आपस में बात कर रहे हों और कोई तीसरा आ कर आप की बात सुनने लगे या बीच में बोलने लगे तो कैसा लगता है ? या सवाल आप किसी से पूछें और जवाब कोई और दे , या कोई जबरदस्ती अपनी राय आप के ऊपर मढ़ने लगे, या आपकी बात पर ध्यान न दे और आपकी बात पूरी होने के पहले ही अपनी बात शुरू कर दे , तो कैसा लगता है ? बिलकुल अच्छा नहीं लगता है , आप ही नहीं किसी को भी अच्छा नहीं लगता है।
यह तरीका जीवन के व्यवहारिक पक्ष में कितना घातक हो सकता है ? इसका एक सत्य उदहारण मै देना चाहूँगा। मेरे एक रिश्तेदार हैं , मै उनका नाम पब्लिकली तो नहीं ले सकता , आप कुछ भी अपने से मान लीजिये। उनके माता जी का देहान्त हुआ तो , न तो कोई रिश्तेदार आया , न उनके मुहल्ले का कोई व्यक्ति लाश उठाने को तैयार हुआ , वह शाम तक रिश्तेदारों का इन्तजार करते रहे और जब कोई नहीं आया तो शाम को डेड बॉडी टेम्पो पर लाद कर घाट पर ले गए।
ऐसा क्यों हुआ ? जरा उनके बारे में जान लीजिये। वह ट्रेन में हों , बस में हों , घर में हों , रिश्तेदारी में हों या कहीं भी हों , उनके सामने किसी टॉपिक पर , कोई भी व्यक्ति , कोई चर्चा कर दे , तो उसको वे अपने लिए एक चैलेंज मान लेते हैं और उस पर तब तक बहस करते रहेंगे , जब तक सामने वाले को उठने या भागने पर मजबूर न कर दें , या उसे हरा न दें। पर आप जानते हैं उनके इन आदतों की वजह से हम सब उन से बातचीत में घबराने लगे , उनसे दूर होने लगे। वे अगर मोबाइल पर फ़ोन करते हैं तो मेरी पत्नी या बच्चे उनका फ़ोन नहीं उठाते , क्यों कि वे हर बात में से बात निकल कर बहस करने लगेंगे । मै उठाता हूँ तो , जैसे ही वह बातचीत लम्बा करने की कोशिश करते हैं , मुझे कहना पड़ जाता है कि , भइया मुझे कुछ जरूरी काम है , कुछ जरूरी बात पहले कर लीजिये और मै बरी हो लेता हूँ।
इसी तरह मै ही नहीं सब को बुरा लगा और वह इतनी बुरी स्थिति में आ गए , लेकिन आप क्या समझते हैं कि उन्हें कभी ये लगा कि वे कुछ गलत कर रहे हैं , नहीं उनके अनुसार लोग बुरे हैं।
अगर आप चाहते हैं कि लोग आपको पसंद करें तो बातचीत में यह सावधानियां अवश्य रखें -
१ - जब दो लोग कोई आपसी बात कर रहे हों तो शामिल होने की कोशिश न करें।
२ - किसी की बातचीत चुपके से न सुनें।
३ - आप तब तक अपनी राय न दें जब तक आपसे मांगी न जाय।
४ - सामने वाले की बात सुनें और समाप्त होने पर ही अपनी बात शुरू करें।
५ - हर बात में दखलन्दाजी न करें।
६ - किसी और से पूछे गए सवाल का जवाब आप न दें।
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