Tuesday, 10 November 2015

Happy Deepawawali, an emotional story

deepawali 1
शिवा के घर में आज ज्यादा चहल पहल थी । आज दीपावली जो थी । घर में सब थे, बूढ़े मां-बाप, पत्नी दो बच्चे एक लड़का एक लड़की । दोनों अपनी पढ़ाई पूरी कर के जॉब पर लग गए थे। बच्चे आते समय अपने मम्मी पापा के लिए, दादा दादी के लिए गिफ्ट लाना नहीं भूलते थे, सब के लिए कपड़े हो कुछ और जरुरत के सामान जरूर लाते थे, दीपक और दिव्या नाम थे शिवा के बच्चों का। दीपक बिल्कुल दीपक की तरह, घर और खानदान का नाम रोशन कर रहा था । अपनी B.Tech की पढ़ाई पूरी कर के मल्टीनेशनल कंपनी में लग गया था, दिव्या भी कुछ कम नहीं थी वह CA की पढ़ाई पूरी कर के Pune की किसी कंपनी में लग गई थी। कुल मिलाकर एक संतुलन बन गया था, सब बहुत खुश थे, शिवा के मां-बाप भी अभी ज्यादा बूढ़े तो नहीं थे पर उनको बुढ़ापे वाली बीमारी थी।
शिवा का जीवन इस समय एक दम खुशहाल था , आर्थिक स्थिति बहुत बढ़िया थी, बाबूजी का पेंशन, खुद एक मिल श्रमिक की तनख्वाह , बच्चों की सैलरी मिलाकर अच्छी Income थी। सबने मिल कर इस धनतेरस पर एक कार खरीद लिया था, सब बहुत खुश थे सबको आज दीपावली के दिन किसी धार्मिक स्थल पर अपनी फैमिली कार से ड्राइव पर जाना था, सब अपने-अपने नए कपड़े पहन कर तैयारी बना रहे थे , शिवा माला को बार-बार किसी न किसी काम के लिए आवाज दे रहा था, माला शिवा की पत्नी का नाम था, आज माला भी बहुत खुश थी Excited थी , * आज शिवा के किसी भी कॉल पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी, नहीं तो शिवा के ज्यादा आवाज लगाने पर कुछ न कुछ speech देती , माला शिवा के नए जूते और कपड़े लायी , तुम किसी महाराजा की तरह लग रहे हो जी, माला शिवा की तारीफ में बोले जा रही थी खुशी और excitement में बोले जा रही थी, शिवा,  सिवाय मुस्कुराने के कुछ नहीं कह रहा था , तभी माला से शायद कुछ गलती हो गई , उसने कहा सुनते हो जी, मेरे भैया ने, भाभी से झगड़ा कर लिया है , और कह रहे है,  दीपावली के बाद संयास ले लूंगा, शिवा अब तक शांत था और मुस्कुरा रहा था, बोला, वह सन्यास नहीं लेंगे, सन्यास उनके बस का नहीं है, जिसको संयास लेना होता है वह कहता नहीं है, माला ने कहा, जैसे तुमको लेना हो, तो ले ही लोगे, शिवा बोला तो कुछ नहीं पर जैसे ही माला अंदर गई वह संयास के लिए चल पड़ा। अपने पीछे एक note छोड़ गया, आप सबको हैप्पी दीपावली। यह दीपावली मेरे लिए कुछ ज्यादा ही खास है, मैं उसको खोजने जा रहा हूं जो अंदर जलता है] अंतरात्मा में। तुम सब ना परेशान होना , ना ढूंढने की कोशिश करना, परमात्मा का शुक्रगुजार होना
जिन्होंने मुझे वह power दिया, कि मैं असली दीपक से दीपावली मना सकूं, दीपावली का आनंद मनाओ खुश रहो मैंने आज से अभी से सन्यास धारण कर लिया है , अब पूरा गगन और पूरी] धरती मेरे पिता और मां है,
और पूरी दुनिया के लोग मेरा रिश्तेदार है, सन्यास वही धारण कर सकता है जो स्वस्थ हो संपन्न हो और  आर्शीवादित हो। आज अमावस्या की रात मुझे अन्तरात्मा का दीपक जलाने दो।

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