परमात्मा इतना विशाल है कि वह आप के किसी मूर्ति, फोटो, आकार, मंदिर , मस्जिद या गिरिजा में नहीं समां सकता। वह विशाल से भी विशाल और छुद्र से भी छुद्र है। विशाल इतना है कि इस पृथ्वी जैसे पचास हजार से ज्यादा पृथ्वी मैनेज कर रहा है जैसा कि हमारे वैज्ञानिक बताते हैं, और छोटा इतना है की अंत में गायब हो जाता है, हमारे वैज्ञानिकों कीं पहुँच से बहुत दूर हो जाता है। लेकिन दुनिया तब भी चलती रहती है। इसी लिए आज तक कोई नहीं समझ पाया कि दुनिया बनी किससे है , और इसका परिचालन कैसे हो रहा है , कौन कर रहा है ? अब ऐसे में अगर आप परमात्मा को कोई आकार देते हैं या कोई सीमा प्रदान करते हैं तो ये हमारी आपकी लघु तम मानसिकता के अलावा कुछ नहीं है। परमात्मा को कोई समझा नहीं पाया , क्यों कि परमात्मा कोई समझाने की चीज भी नहीं है , परमात्मा को सिर्फ महसूस किया जा सकता है। परमात्मा हमारे आस पास हर जगह है। असल में सब कुछ परमात्मा ही है , बिना परमात्मा के कुछ भी सम्भव ही नहीं है। दृश्य अदृश्य में उपस्थित हर चीज अपना धर्म इस लिए दिखा पाता है कि उसके अंदर परमात्मा का वास होता है। हम सब परमात्मा के अंदर ही वास करते हैं और परमात्मा हमारे एक एक रोम में वास करता है। परमात्मा सबसे बड़ा वैज्ञानिक है वह अपने अंदर बहुत से रहस्य छुपा रखा है। जब हमारे वैज्ञानिक कुछ खोज करते हैं तो वे अलग से कुछ पैदा नहीं करते हैं , बल्कि प्रकृति के गर्भ में छुपे अनंत रहस्यों से कुछ की झलक पा जाते हैं। इसी लिए मैं कहता हूँ कि हमारी आपकी हैसियत नहीं है उसे सीमा प्रदान करें । उसके लिए लड़ें , एक दूसरे की हत्या करें ? किस भगवान ने कहा , किस अल्लाह ने किस जीसस ने दूसरे को धर्म विरोधी कहने को कहा ? असल में लड़ने का मन हमारा आप का है , धर्म तो एक बहाना है। लड़ना हमारे स्वाभाव में है। हम पैदा ही लड़ते लड़ते हुए हैं। हमारा विकास ही जानवर से हुआ है , और हमारी पाशविकता अभी गयी नहीं है। जब लोग लड़ रहे हों उनके चेहरों को ध्यान से देखिये किन्ही लड़ते कुत्तो जैसे शक्ल रहती है या नहीं , किसी अकेली लड़की को अकेले में मिलने पर अपने को देखे पाशविकता पैदा होती है की नहीं ? हमारे लड़ने से न तो परमात्मा को दुःख होता है न ही प्रसन्नता , उसे कुछ भी फर्क नहीं पड़ता है, परन्तु हमें फर्क पड़ता है। परमात्मा तो अनंत है अथाह है अबूझ है , इसी लिए इस जगत को हिन्दू माया कहते हैं। हमारे आपके लड़ने से परमात्मा को नहीं , हमें फर्क पड़ता है।
समुद्र के तेज लहरों से बहुत सी छोटी छोटी मछलियाँ बाहर आ कर तड़प रही थी , एक व्यक्ति एक एक मछली को उठा कर वापस समुद्र में फेंक दे रहा था , दूसरे व्यक्ति ने कहा तुम्हारे एक एक मछली को वापस समुद्र में फेकने से समुद्र को क्या फर्क पड़ेगा ? उस आदमी ने बहुत ही अछा जवाब दिया समुद्र को तो नहीं पर, उस मछली पर जरूर फर्क पड़ेगा जिसको जीवन दान मिल गया है। हे धर्म के ठेके दारों हमें जीने दो , आप के लड़ने से हमारी दुनिया तबाह हो रही है। आप हमारे परमात्मा को खुश करने का ठेका बंद कर दे। हम अपने अपने परमात्मा को अपने अपने तरीके से खुश कर लेंगे। आप हमें बख्श दें , आप की बड़ी मेहरबानी होगी।
समुद्र के तेज लहरों से बहुत सी छोटी छोटी मछलियाँ बाहर आ कर तड़प रही थी , एक व्यक्ति एक एक मछली को उठा कर वापस समुद्र में फेंक दे रहा था , दूसरे व्यक्ति ने कहा तुम्हारे एक एक मछली को वापस समुद्र में फेकने से समुद्र को क्या फर्क पड़ेगा ? उस आदमी ने बहुत ही अछा जवाब दिया समुद्र को तो नहीं पर, उस मछली पर जरूर फर्क पड़ेगा जिसको जीवन दान मिल गया है। हे धर्म के ठेके दारों हमें जीने दो , आप के लड़ने से हमारी दुनिया तबाह हो रही है। आप हमारे परमात्मा को खुश करने का ठेका बंद कर दे। हम अपने अपने परमात्मा को अपने अपने तरीके से खुश कर लेंगे। आप हमें बख्श दें , आप की बड़ी मेहरबानी होगी।
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